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होली क्यों मनाई जाती है: 2021 में होली कब है?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट में, इस आर्टिकल में आपको बताउगा कि होली क्यो मनाई जाती है, होली के त्यौहार का महत्व क्या है, होली का त्यौहार कैसे मानते है, 2021 में होली कब है, होलिका दहन कब है 2021 तथा होली 2021 तिथि और शुभमुहूर्त आदि की जानकारी हम आपको इस लेख के माध्यम से देंगे!


होली क्यों मनाई जाती है: ( Holi Kyo Manai Jati Hai ) 2021 में Holi कब है? Date और Time ( शुभमुहूर्त )- होलिका दहन कब है- Holi Essay in Hindi (निबन्ध)
Holi Kyo Manayi Jati Hai In Hindi



होली का त्यौहार क्यो मनाया जाता है? क्या है इसके पीछे की कहानी ( Holi Essay In Hindi 2021 )



Holi भारत का अत्यंत प्राचीन पर्व है जो होली, होलिका या होलाका नाम से मनाया जाता था। वसंत की ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सवऔर काम-महोत्सव भी कहा गया है। हर त्यौहार की अपनी एक कहानी होती है, जो धार्मिक मान्यताओ पर आधारित होती है। होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था।जो अपने छोटे भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेना था क्यूंकी भगवान विष्णु ने ही उसके छोटे भाई को मारा था। हिरण्यकश्यप ने अपने छोटे भाई का बदला लेने के लिए ब्रम्हा जी की तपस्या की और उसे वरदान भी मिल ही गया।


ब्रम्हा जी से मिले इस वरदान से हिरण्यकश्यप को घमंड हो गया और खुद को ही भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की पूजा और भक्ति करने को कहने लगा।अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। बहुत सालों बाद हिरण्यकश्यप राजा का एक बेटा हुआ जिसका नाम प्रहलाद पड़ा। प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह अपने दुष्ट पिता का कहना नही मानता था और वह भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति में ही विलीन रहता था। यह देख कर हिरण्यकश्यप को बहुत गुस्सा आता था क्यूंकी वो भगवान विष्णु को अपना शत्रु समझता था। प्रह्लाद की भगवान विष्णु भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा।


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Hiranyakashyap Vadh




तब दुष्ट हिरणकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया, हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकश्याप ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। विष्णु भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है।




होली कैसे मनाते है। होली त्यौहार का महत्व



भारत देश त्योहारों का देश है, यहाँ भिन्न जाति के लोग भिन्न भिन्न त्यौहार को बड़े उत्साह से मनाया करते है और इन्ही त्यौहार में से एक त्यौहार है “होली” 

Holi वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। फिर दूसरे दिनलोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है।


ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।


गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहाँ उनका स्वागत गुझिया,नमकीन व ठंडाई से किया जाता है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है।


भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है।



पौराणिक मान्यतायें/कथाएं


1. नृसिंह रूप में भगवान इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्यप नामक असुर का वध कर भक्त प्रहलाद को दर्शन दिए थे। बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी।

2. हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है। 

3. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था। 

4. इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था। इन सभी खुशियों को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है।

5. त्रेतायुग में विष्णु के 8वें अवतार श्री कृष्ण और राधारानी की होली ने रंगोत्सव में प्रेम का रंग भी चढ़ाया। श्री कृष्ण होली के दिन राधारानी के गांव बरसाने जाकर राधा और गोपियों के साथ होली खेलते थे। कृष्ण की रंगलीला ने होली को और भी आनंदमय बना दिया और यह प्रेम एवं अपनत्व का पर्व बन गया

6. भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।



होलिका दहन कब है? 2021 में Holi कब है तिथि और शुभमुहूर्त





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Holika Dahan Kab Hai 2021


रंगों का यह त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है। होली रंगो का त्योहार इस वर्ष यह 29 मार्च 2021 को मनाया जाएगा, इससे एक दिन पहले 28 मार्च को होलिका दहन किया जाता है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 28 मार्च 2021 दिन रविवार की रात में होलिका दहन किया जाएगा ! जिस दिन रंग खेला जाता है, उसे कहीं कहीं धुलेंडी भी कहा जाता है। इस वर्ष होली का त्योहार 29 मार्च (सोमवार) को है। इससे एक दिन पहले यानी 28 मार्च (रविवार) को होलिका दहन होगा।



तिथि और शुभमुहूर्त ( Holi 2021 Date and Time )



  • होलिका दहन का दिन : 28 मार्च 2021, रविवार
  • रंगों की होली खेलने का दिन : 29 मार्च 2021, सोमवार
  • होलिका दहन का शुभ मुहूर्त : शाम 6.37 बजे से रात 8.56 बजे तक (अवधि 02 घंटे 20 मिनट)
  • पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 मार्च सुबह 3.27 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त : 29 मार्च रात 12.17 बजे


होलिका दहन के दिन बन रहे शुभ मुहूर्त-


  • अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक।
  • अमृत काल - सुबह 11 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक।
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 50 मिनट से सुबह 05 बजकर 38 मिनट तक।
  • सर्वार्थसिद्धि योग - सुबह 06 बजकर 26 मिनट से शाम 05 बजकर 36 मिनट तक। इसके बाद शाम 05 बजकर 36 मिनट से 29 मार्च की सुबह 06 बजकर 25 मिनट तक।
  • अमृतसिद्धि योग - सुबह 05 बजकर 36 मिनट से 29 मार्च की सुबह 06 बजकर 25 मिनट तक।




होली के त्यौहार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न ( FAQ in Hindi 2021 )



प्रश्न 1:- होलिका के पिता का क्या नाम था?
उत्तर:-  होलिका के पिता का नाम कश्यप ऋषि था।

प्रश्न 2:- होलिका के माता का क्या नाम था?
उत्तर:- होलिका के माता का नाम दिति था !

प्रश्न 3:- होलिका का दूसरा नाम क्या था?
उत्तर:- होलिका का दूसरा नाम हरदोई या हरिद्रोही था. होलिका को हरि का द्रोही भी कहा जाता था, इसलिए उन्होंने इसका नाम हरिद्रोही रखा गया था !

प्रश्न 4:- होली कौन से महीने में पड़ती है?
उत्तर:- होली हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने में पड़ती है !

प्रश्न 5:- होली में रंगों का इस्तमाल क्यूँ किया जाता है?
उत्तर:- ऐसा माना जाता है की भगवान कृष्ण अपने दोस्तों के साथ होली के दिन रंगों से खेला करते थे, और तभी से होली को रंगों का त्यौहार भी कहा जाता है!


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