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सेकेंडरी मेमोरी क्या है? ( What is Secondary Memory In Hindi )


सेकेंडरी मेमोरी क्या है-What is Secondary Memory In Hindi-Types of Secondary Memory in Hindi-सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) की विशेषताए
Secondary Memory Kya Hai In Hindi




यह मेमोरी Computer Memory की तीसरी और आखिरी मेमोरी होती है इसे External या Non-Volatile Memory के नाम से भी जाना जाता हैं इसका इस्तेमाल मुख्य रूप में डाटा को लम्बे समय के लिए स्टोर करने के लिए किया जाता है ये प्राइमरी मेमोरी ( Main Memory ) के मुकाबले धीमी होती है लेकिन इनकी कैपेसिटी बहुत ज्यादा होती है Secondary Memory CPU का भाग नही होती हैं CPU डायरेक्टली सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस नहीं कर सकता है, इसके लिए सेकेंडरी मेमोरी में स्टोर डाटा पहले RAM में लोड होता है जहाँ से फिर CPU उस डाटा को एक्सेस करता है इसलिए इस मेमोरी को Secondary Memory ( स्थाई मेमोरी ) कहा जाता है! आईये अब जानते हैं सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) कितने प्रकार की होती है-



सेकेंडरी मेमोरी कितने प्रकार की होती है? Types of Secondary Memory in Hindi

  1. मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
  2. मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) 
  3. ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)
  4. यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)

सेकेंडरी मेमोरी क्या है-What is Secondary Memory In Hindi-Types of Secondary Memory in Hindi-सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) की विशेषताए
Types Of Secondary Memory






1. मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape):- Magnetic Tape देखने में किसी पुराने जमाने के Tape Recorder की कैसेट की तरह होती थी, इसमें प्‍लास्टिक के रिबन पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, जिस पर डाटा स्‍टोर करने के लिये हेड का प्रयोग किया जाता था बिलकुल टेप रिकार्डर की तरह, और यह काफी सस्‍ते होते थे!


2. मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk):- Megnetic Disk दो प्रकार की होती है, फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) और हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)


फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk):- Floppy Disk बहुत पतले प्‍लास्टिक की एक गोल डिस्‍क होती है जो एक प्‍लास्टिक के कवर में बंद रहती थी, इस डिस्‍क पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) आकार एवं और स्‍टोरेज के आधार पर दो प्रकार की होती है! 

  • मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) :- Mini Floppy का व्‍यास (Diameter) 3½ इंच का होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 1.44 MB होती है इसे कंप्‍यूटर में रीड करने के लिये 3½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है, यह लगभग 360 RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्‍कर/घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूमती है!


  • माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy)- Micro Floppy का व्‍यास (Diameter) 5½ इंच होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 2.88 MB होती है, इसके भी 5½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है!


हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive):- दुनिया की पहली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) के निर्माता IBM हैं, जिसे 1980 में बनाया गया था, यह एक यह एलुमिनियम धातु की डिस्क होती है यह डिस्‍क एक धुरी पर बडी तेजी से घूमती है और इसकी गति को RPM यानि Revolutions Per Minute में मापा जाता है, आज तक बाजार में 5200 RPM और 7200 RPM वाली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) उपलब्‍ध है, हार्डडिस्‍क ड्राइव में Track और Sector में डाटा स्टोर होता है. एक सेक्टर में 512 बाईट डाटा स्टोर होता है, 80 के दशक में आयी हार्डडिस्‍क ड्राइव जिसके पहले पार्टीशन को नाम दिया गया "C" ड्राइव और आज जब आप विंडोज इंस्‍टॉल करते हो तो वह सबसे पहले "C" ड्राइव में ही इंस्‍टाॅल होती है। अगर स्‍टोरेज की बात करें ताे हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) को प्रमुख सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता है वर्तमान में 1 टैराबाइट से लेकर 100 टैराबाइट तक की हार्ड डिस्‍क उपलब्‍ध हैं!


3. ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk):- Optical Disk में पॉली कार्बोनेट की गोल डिस्‍क होती है, जिस पर एक रासायनिक पदार्थ का लेप रहता है ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) डेटा डिजिटली रूप में सुरक्षित रहता है, डाटा को ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) पर रीड और राइट करने के लिये कम क्षमता वाले लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है Optical Disk तीन प्रकार की होती है सीडी (CD), डीवीडी ड्राइव (DVD) और ब्लू रे (Blu Ray)

  • सीडी (CD):- सीडी (CD) का पूरा नाम कॉम्‍पेट डिस्‍क है, इसकी क्षमता हार्डडिस्‍क से कम और फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) से ज्‍यादा होती है, इसमें कुछ 700MB डाटा को स्‍टोर किया जा सकता है, इसमें डाटा लगभग 30 वर्षो तक सुरक्षित रह सकता है, लेकिन इसकी सतह पर स्‍क्रैच आने पर डाटा को रीड और राइट करने में परेशानी होती है!


  • डीवीडी ड्राइव (DVD):- सीडी (CD) की अपेक्षा डीवीडी (DVD) यानी डिजिटल वर्सटाइल डिस्‍क की स्‍टोरेज क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन देखने में यह दोनों एक जैसी ही लगती है डीवीडी (DVD)की स्‍टोरेज क्षमता करीब 4.7 जीबी से लेकर 17 जीबी तक होती है, लेकिन स्‍क्रेच वाली समस्‍या यहां भी है!


  • ब्लू रे (Blu Ray):- ब्लू रे (Blu Ray) देखने में CD और DVD की तरह ही होती है लेकिन इसको रीड और राइट करने के लिये जिसे लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है वह नीले रंग-जैसी बैंगनी किरण होती है इसलिये इसे ब्लू रे (Blu Ray) कहा जाता है, इस प्रकाश की वजह से ब्‍लूरे डिस्‍क पर 50 जीबी तक डाटा स्‍टोर किया जाता सकता है!


4. यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive):- यह वर्तमान की सबसे पॉपुलर और पोर्टबल सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस है जो USB पोर्ट के माध्यम से कंप्यूटर से जोड़ी जाती है जिसे हम पेन ड्राइव के नाम से भी जानते है, इसका प्रयोग वीडियो, ऑडियो के अलावा अन्‍य डेटा को सेव करने के लिए किया जाता है!



सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) की विशेषताए 

  • Secondary Memory एक स्थिर मेमोरी होती है!
  • इसमें डेटा परमानेंटली स्टोर होता है, इसलिए इसे बैकअप मेमोरी भी कहते है!
  • सेकेंडरी मेमोरी Non-Volatile Memory होती है!
  • सेकेंडरी मेमोरी का इस्तेमाल कंप्यूटर में डाटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है!
  • प्राइमरी मेमोरी की तुलना में Secondary Memory बहुत ही धीमी होती है!


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निष्कर्ष-

आज आपने जाना सेकेंडरी मेमोरी क्या है और कितने प्रकार की होती है? आपको हमारा लेख What is Secondary Memory In Hindi पसन्द आया होगा ! यदि आपके मन में इस लेख को लेकर कोई भी सवाल या सुझाव हैं तो आप नीचे कमेंट करके हमे बता सकते है, इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उन्हे भी कम्प्यूटर मेमोरी के बारे में जानकारी मिल जाएं!

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