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Diwali क्यों मनाते हैं - 2021 में दीपावली कब है?

दोस्तों हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बतायेगे कि Diwali Kyo Manate hai पूरी जानकारी हिंदी में, इस लेख में आपको Diwali क्यों मनायी जाती है, दिवाली कब है, दिवाली कितने दिनों का त्यौहार है, 2021 में Diwali Kab Hai की पूरी जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी| 


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Diwali क्यों मनाते हैं - 2021 में दीपावली कब है- Essay on Diwali in Hindi



Diwali क्यों मनाते हैं - Diwali Essay In Hindi 2021


दीवाली शरद ऋतु  में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, भारत एक येसा देश है जिसको त्योहारों की भूमि कहा जाता है, और इसी कारण किसी न किसी त्यौहार का माहौल बना ही रहता है| इन्ही त्योहारों में से एक खास त्यौहार या पर्व दीपावली भी है जो दशहरा के ठीक 20 दिन बाद आता है|


दिवाली के त्योहार को दीप पर्व अर्थात दीपों का त्योहार कहा जाता है। इस त्यौहार को देश में ही नही बल्कि विदेश में भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है, लेकिन हम दीपावली क्यों मनाते है-दिवाली क्यों मनाई जाती है आखिर इसके पीछे क्या कारण है  तो आईये आज हम आपको दिवाली से सम्बंधित कारण बताते है क्योकि इसके पीछे अलग-अलग कहानियां और अलग-अलग परम्पराए है, तो चलिए जानते है Diwali क्यों मनाई जाती है?


1. भगवान् श्री  राम के वनबास से अयोध्या लौटने की ख़ुशी में:-

यह कहानी सभी देश वासियों को पता है कि हम दीपावली भगवान् श्री राम के वनबास से लौटने की ख़ुशी में मनाते है, जब भगवान् श्री राम अपने पिता के आदेश का सम्मान करते हुए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनबास गये थे तब वहा पर माता सीता को दुष्ट रावन ने अपहरण कर लिया था|

तब भगवान् श्री राम ने सुग्रीव  की वानर सेना और प्रभु हनुमान के साथ मिलकर दुष्ट रावण का वध किया था और माता सीता को छुड़ा लाये थे, तो उस दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है, और जब श्री राम 14 वर्ष के वनबास के पश्चात् अयोध्या लौटे थे तो अयोध्यावासियो का हर्दय अपने प्रिये राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था, श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। तब से यह दिन दीपावली के नाम से जाना जाता है|


2. पांडवो का अपने राज्य में वापस लौटना:-

आप सभी लोगो ने महाभारत की कहानी तो सुनी होंगी जब कौरवों ने मामा शकुनी की मदद से पांड्वो का सब कुछ छीन लिया था और पांड्वो को राज्य छोड़कर 13 वर्ष का वनबास काटना पड़ा था| जब पांचो पांडव 13 वर्ष बाद कार्तिक अमावश्या को वनबास से अपने राज्य लौटे थे तो राज्य के लोगो ने उनके लौटने पर खुशिया मनाई और दीप जलाये| 


3. भगवान् श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का किया था वध:-

एक कथा के अनुसार येसा माना जाता है की जब भगवान् श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था  द्वारिका की प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी तो द्वारिका की प्रजा ने दीप जलाकर उनका धन्यबाद किया था|


4. माता लक्ष्मी का स्रष्टि में अवतार:- 

एक और परम्परा के अनुसार सतयुग में जब समुद्र मंथन हुआ था तो समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुयी थी, माता लक्ष्मी को धन और सम्रध्धि की देवी माना जाता है देवी लक्ष्मी के प्रकट होने पर दीप जलाकर उनकी वंदना की थी इसी कारण हम लोग भी प्रति वर्ष दीप जलाने के साथ-साथ माता लक्ष्मी जी की भी पूजा करते है| यह भी दीपावली मानाने का मुख्य कारण है|


जो भी कथा हो, जो भी परम्परा हो एक बात तो निश्चित है कि दीपक को सत्य और आनंद का प्रतीक माना जाता है, क्योकि वह स्वं जलता है और दुसरो को प्रकाश देता है| भारतीय संस्कृति के अनुसार दीपक की इसी विशेषता के कारण धार्मिक पुस्तको में दीपक को व्रम्हा का स्वरुप माना जाता है| धार्मिक पुस्तक 'स्कंद पुराण' के अनुसार दीपक का जन्म यज्ञ से हुआ है। यज्ञ देवताओं और मनुष्य के मध्य संवाद साधने का माध्यम है। यज्ञ की अग्नि से जन्मे दीपक पूजा का महत्वपूर्ण भाग है।




दीपावली कब है- 2021 Me Diwali Kab Hai


Diwali 2021 Date in India Calendar in Hindi: दिवाली 2021 में 4 नवम्बर दिन गुरूवार को मनायी जाएगी दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, दिवाली पर माता लक्ष्मी,कुवेर जी और श्री गणेश जी की पूजा की जाती है|


दिवाली 2021 Date और शुभ मुहूर्त:-


दिवाली की तिथि: 4 नवम्बर 2021 दिन गुरूवार

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 04 नवबंर 2021, सुबह 06:03 बजे से 

अमावस्या तिथि समाप्त: अगले दिन 05 नवबंर 2021, 02:44 बजे

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 06:10 बजे से रात्रि 08:06 बजे तक ( 4 नवम्बर  2021 )

प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05:34 बजे से रात्रि 08:10 बजे तक



दिवाली कितने दिनों का त्यौहार है

Diwali के 5 दिनों का महत्व 


हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार दीपावली का उत्सव 5 दिनों तक चलता है। दक्षिण भारत और उत्तर भारत में इस त्योहार को अलग-अलग दिन और अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में दिवाली के 1 दिन पहले यानी नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व है। जबकि उत्तर भारत में यह त्योहार 5 दिन का होता है, जो धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, मुख्य पर्व दीपावली, गोवर्धन पूजा से होते हुए भाई दूज पर समाप्त होता है। तो चलिए जानते है इन पांच दिनों के बारे में संझिप्त में-


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पहला दिन:- दीपावली महोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है, उत्सव के पहले दिन, घरों और व्यावसायिक परिसर को सजाया जाता हैं इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं| धन और समृद्धि (लक्ष्मी) की देवी के स्वागत के लिए रंगोली द्वारा प्रवेश द्वार बनाए जाती है। इसी दिन समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे और उनके साथ आभूषण व बहुमूल्य रत्न भी समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे। तभी से इस दिन का नाम 'धनतेरस' पड़ा और इस दिन बर्तन, धातु व आभूषण खरीदने की परंपरा शुरू हुई।


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दूसरा दिन:- दूसरे दिन नर्क चतुर्दशी होती है, कहानी के अनुसार इसी दिन नरकासुर इंद्र देव को हराने के बाद अदिति के मनमोहक झुमके छीन लेते हैं और अपने अन्त:पुर में देवताओं और संतों की सोलह हजार बेटियों को कैद कर लेता हैं। नर्क चतुर्दशी के अगले दिन, भगवान कृष्ण ने दानव नरकासुर का वध कर भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस दिन को लेकर मान्यता है कि महिलाओं ने अपने शरीर से गंदगी को धोने के लिए एक अच्छा स्नान किया था| इसलिए, सुबह जल्दी स्नान की यह परंपरा बुराई पर दिव्यता की विजय का प्रतीक है। इस दिन सुबह जल्दी जागना और सूर्योदय से पहले स्नान करने की एक परंपरा है।


तीसरा दिन:- तीसरा दिन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण दिन है तीसरे दिन को 'दीपावली' कहते हैं। दीपावली का पर्व विशेष रूप से मां लक्ष्मी के पूजन का पर्व होता है, जिन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। अंधियारी रात होने के बावजूद भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा द्रव्य, आभूषण आदि का पूजन करते है, छोटे छोटे टिमटिमाते दीपक पूरे शहर में प्रज्वलित होने से रात का अभेद्य अंधकार धीरे-धीरे गायब हो जाता है। इस दिन भगवान रामचन्द्रजी माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर घर लौटे थे।


चौथा दिन:- समारोह का चौथा दिन वर्ष प्रतिपदा के रूप में जाना जाता है, चौथे दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा होती है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब भगवान कृष्ण ने भगवान इंद्र की मूसलाधार बारिश के क्रोध से गोकुल के लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा भी चली आ रही है।


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पांचवा दिन:- इस दिन को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं, भाइयों और बहनों के बीच प्रेम का प्रतीक दर्शाता है भाई दूज, पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का अंतिम दिन होता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक कर भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है, भाई उन्हें उनके प्यार की निशानी के रूप में एक उपहार देते हैं। इस दिन को लेकर मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने के लिए उनके घर आए थे और यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया एवं यह वचन लिया कि इस दिन हर साल वे अपनी बहन के घर भोजन के लिए पधारेंगे। साथ ही जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित कर तिलक करके भोजन कराएगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी। तभी से भाई दूज पर यह परंपरा बन गई।



धन (लक्ष्मी देवी) बहुत क्षणिक है और यह केवल वहीं रहती है, जहां कड़ी मेहनत, ईमानदारी और कृतज्ञता हो। श्रीमद भागवत में, वहाँ एक घटना के बारे में एक उल्लेख है जब देवी लक्ष्मी ने राजा बली का शरीर छोड़ दिया और भगवान इंद्र के साथ जाना चाहती थी, तब उन्होंने कहा कि वह केवल वहीं रहती है, जहां 'सत्य', 'दान', 'तप', 'पराक्रम' और 'धर्म' हो। 


इस दिवाली हम सब प्रार्थना करे और आभारी महसूस करें। विश्व के हर कोने में समृद्धि हो और सभी लोग प्यार, खुशी और अपने जीवन में विपुलता का अनुभव करे।



दोस्तों आपने इस लेख में जाना कि Diwali Kyo Manate haiDiwali क्यों मनायी जाती हैदिवाली कब हैदिवाली कितने दिनों का त्यौहार है2021 में Diwali Kab Hai पूरी जानकारी हिंदी में| तो उम्मीद करता हूँ कि आपको ये लेख पसंद आया होंगा तो आप हमे नीचे कमेंट करके बता सकते है तथा इस पोस्ट को अपने जानने बालो के साथ जरूर शेयर करें|

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